शैक्षणिक सत्र 2026-2027 हेतु प्रवेश प्रक्रिया प्रारम्भ
श्री राम वैदिक गुरुकुल सेवा संस्थान में वेद, व्याकरण, दर्शन एवं समकालीन ज्ञान के समन्वित अध्ययन हेतु 8 से 12 वर्ष के बालकों के लिए प्रवेश आवेदन आमंत्रित हैं।
षट्-चरणीय प्रवेश प्रक्रिया
प्रारम्भिक पंजीकरण से पवित्र विद्यारम्भ तक की सुव्यवस्थित यात्रा।
पाठ्यक्रमों का अवलोकन
आश्रम के आदर्शों को समझने हेतु वैदिक, संस्कृत एवं शास्त्र शाखाओं तथा दिनचर्या का अध्ययन करें।
पात्रता सत्यापन
सुनिश्चित करें कि छात्र की आयु १०-१४ वर्ष के मध्य हो तथा उसने ५वीं कक्षा उत्तीर्ण कर ली हो।
ऑनलाइन आवेदन
ऑनलाइन प्रपत्र पूर्ण करें, प्रमाणपत्र संलग्न करें तथा अपनी संदर्भ संख्या प्राप्त करें।
निरीक्षण शिविर
चयनित अभ्यर्थी गुरुकुल परिसर में ३-दिवसीय आवासीय मूल्यांकन शिविर में सम्मिलित हों।
आचार्य साक्षात्कार
अंतिम प्रवेश हेतु अभिभावकों के साथ प्रधानाचार्य जी से प्रत्यक्ष संवाद।
पवित्र विद्यारम्भ
उपनयन संस्कार (यथावश्यक), पारंपरिक वस्त्र वितरण एवं वेदाध्ययन में दीक्षा।
पात्रता मापदंड एवं नियमावली
- आयु सीमा: छात्र की आयु 8 से 12 वर्ष के मध्य होनी चाहिए (जन्म प्रमाण पत्र एवं आधार से सत्यापित)।
- शैक्षणिक योग्यता: प्राथमिक शिक्षा या पूर्व कक्षा उत्तीर्ण।
- स्वास्थ्य: बालक शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए ताकि वह गुरुकुल की प्रातःकालीन दिनचर्या में सहज रह सके।
- संस्कार: सनातन धर्म, वैदिक संस्कृति के प्रति निष्ठा एवं अभिभावकों की पूर्ण सहमति।
आवश्यक प्रलेखों की सूची
- कक्षा टी.सी. (Transfer Certificate): विद्यालय स्थानांतरण प्रमाण पत्र।
- पूर्व कक्षा की अंकतालिका: उत्तीर्ण कक्षा की प्रामाणिक मार्कशीट।
- आधार कार्ड: छात्र का पहचान पत्र।
- जन्म प्रमाण पत्र: सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्गत वैध जन्म प्रमाण पत्र।
प्रवेश सम्बन्धी महत्वपूर्ण तिथियाँ
आवेदन की अंतिम तिथि, निरीक्षण शिविर तथा दिशा-निर्देश सत्रों की जानकारी।
ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा करने की अवधि
पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन एवं वांछित प्रमाणपत्र अपलोड करने का समय।
प्रथम संस्कार एवं अवलोकन शिविर (बैच अ)
शॉर्टलिस्ट किए गए छात्रों के प्रथम समूह हेतु 3 दिवसीय आवासीय शिविर।
द्वितीय संस्कार एवं अवलोकन शिविर (बैच ब)
शॉर्टलिस्ट किए गए छात्रों के द्वितीय समूह हेतु 3 दिवसीय आवासीय शिविर।
नूतन शैक्षणिक सत्र का शुभारम्भ
उपनयन संस्कार, विद्यारम्भ पूजा एवं नियमित कक्षाओं का प्रारम्भ।