पावन कुलगीत

गुरुकुल गीत (पावन कुलगीत)

श्री राम वैदिक गुरुकुल सेवा संस्थान का पावन कुलगीत

॥ पवित्र कुलगीतम् ॥
॥ ध्रुवपदम् (Chorus) ॥
गुरुकुल गीत
॥ ध्रुवपदम् (Chorus) ॥
गुरु की पूजा, गुरुकुल रचना, भारत का प्राचीन विधान। गुरुकुल पुनः प्रतिष्ठापित हों, जागे भारत का अभिमान ।। भारत फिर से बनें महान ।। धृ ।।
॥ चरणः 1 ॥
घर-घर से भारत की भावी पीढ़ी गुरुकुल हेतु चले। गुरुकुल में गुरुवर की छाया, गुरु-माँ का आशीष मिल्ले ।। सब वर्गों के छात्र-शिष्य हों, संस्कृति के संस्कार पलें। संस्कारों की भाषा गूंजे, छद्म विदेशी नहीं छलें ।। गूँजें वेद ऋचाएँ जग में, उपनिषदों का हो आह्वान ।।1।।
॥ ध्रुवपदम् (Chorus) ॥
भारत फिर से बनें महान ।। धृ ।।
॥ चरणः 2 ॥
आंग्ल गणित इतिहास कलाएँ, संगणकी अभ्यास चलें। सामाजिक भूगोल शिल्प सब, आधुनिकी आभास मिलें ।। पहले जैसे व्याकरणों के, भाषाओं के ज्ञान भले । शस्त्र और शास्त्रों के कृषि के, अध्ययन आयुर्वेद तले ।। सीखें ज्योतिष और खगोलिक, उन्नत शुभ वैदिक विज्ञान ।। 2 ।।
॥ ध्रुवपदम् (Chorus) ॥
भारत फिर से बनें महान ।। धृ।।
कर्नल था कार्नेल कूट जो, कर्नाटक जा युद्ध किया । हार गया रण बुरी तरह वह, हैदर ने फिर पकड़ लिया ।। काटी नाक थमायी हाथों, घोड़ा देकर भगा दिया। बेलगाँव का वैद्य सहजतम, शल्य-क्रिया कर जोड़ दिया ।।
॥ चरणः ३ ॥
गुरुकुल ने ही सदा सिखाया, पूर्ण चिकित्सा श्रेष्ठ निदान ।। ३ ।।
॥ ध्रुवपदम् (Chorus) ॥
भारत फिर से बनें महान ।। ॥धृ॥ धृ ।।
वर्तमान को परिवर्तित कर, गुरुकुल अपनाने होंगे।
वैभवशाली ऋषि अतीत के, त्याग तपी लाने होंगे ।।
शोध तपश्चर्या सेवा के, सब क्रम दुहराने होंगे।।
ज्ञान सुवासित युवा सुमन बस, भारत के सपने होंगे।
॥ चरणः 4 ॥
द्रोण कृपा गुरु धौम्य, शिष्य हों अर्जुन-आरुणि से विद्वान ।। 4।।
॥ ध्रुवपदम् (Chorus) ॥
भारत फिर से बनें महान ।। धृ ।।