ज्ञान • संस्कार • संस्कृति

श्री रामलला गुरुकुलम् वैदिक पाठशाला परिचय

वैदिक ज्ञानधारा एवं गुरु-शिष्य परम्परा का पावन पुनर्जागरण

गुरुकुल भारत की मूल शिक्षा व्यवस्था का एक ऐसा स्वरूप है जो शिक्षार्थियों की सर्वांगीण उन्नति के लिए कृत संकल्प है। जब तक अपने देश में गुरुकुलीय शिक्षा व्यवस्था रही भारत दुनिया का सिरमौर राष्ट्र रहा था। हजारों वर्षों तक पूरे विश्व का शैक्षिक व सांस्कृतिक मार्गदर्शन करता रहा। विश्व प्रसिद्ध नालन्दा तक्षशिला विक्रमशिला इत्यादि गुरुकुलों में पूरी दुनिया से छात्र विद्याध्ययन के लिए भारत आते थे। गुरुकुल आवासीय शिक्षण व्यवस्था है। यहां की दिनचर्या एवं पठन-पाठन प्रातः जागरण से प्रारंभ होकर रात्रि शयन तक आचार्यों की देखरेख में सम्पादित की जाती है। गुरुकुल में व्यावहारिक शिक्षा पर बल दिया जाता है। छात्रों के लिए गुरू (आचार्य) आदर्श होते हैं। छात्र पुस्तक से अधिक यहां के परिवेश तथा आचार्यों का अनुसरण करते हुए शैक्षिक नैतिक ज्ञान अर्जित करते है। गुरुकुल प्रकृति के बीच गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित शैक्षणिक व्यवस्था है। यहां गुरु तथा शिष्य में। आत्मिय संबन्ध होते हैं। गुरुकुल प्रायः समाज पोषित शैक्षणिक संस्थान होते हैं। पूर्व में समाज अपनी कमाई का दसवां भाग गुरुकुल को दान करता रहा जिससे भारत में लाखों गुरुकुल चलते थे। पूरा समाज यहां तक की शासन भी गुरूकुल तथा उसके आचार्यों के प्रति श्रद्धानवत रहता था। गुरुकुल शिक्षा किसी एक विचार अथवा वर्ग को पुष्ट नहीं करती बल्कि यह पूरे समाज एवं हर वर्ग के लिए समान एवं सहज रूप से उपलब्ध शैक्षणिक व्यवस्या है।
✦ हमारे विषय में ✦

दृष्टि, ध्येय एवं मूलभूत सिद्धान्त

वैदिक विद्वत्ता एवं राष्ट्र-निर्माण हेतु हमारा पावन संकल्प

श्री राम लला गुरूकुल वैदिक पाठशाला का उद्देश्य शिक्षार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार एवं संस्कृत से जोड़‌कर आत्म निर्भर नागरिक बनाना। वेद आदि समस्त शास्त्रों का संरक्षण करना। भारत के महान शैक्षणिक एवं सांस्कृति मूल्यों का पुनरूत्थान एवं भारतीय गौरव को पुनः स्थापित करना। शिक्षार्थियों को व्यक्तिगत पारिवारिक सामाजिक राष्ट्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों का समाधान ढूंढने में सक्षम बनाना।
✦ विद्वान आचार्य एवं गुरुवृन्द ✦

प्रबन्धन एवं संरक्षक मण्डल

वैदिक शिक्षा के पावन संकल्प को दिशा देने वाले समर्पित संचालक।

परम पूज्य स्वामी श्री मैथिली रमण शरण जी महाराज (श्री लक्ष्मण किलाधीश सरकार)

परम पूज्य स्वामी श्री मैथिली रमण शरण जी महाराज (श्री लक्ष्मण किलाधीश सरकार)

मार्गदर्शक

आचार्य सदाशिव तिवारी

आचार्य सदाशिव तिवारी

संस्थापक

वेदाचार्य - श्री शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिनीय संहिता वेद कर्मकाण्ड मर्मज्ञ

श्री मति अंकिता तिवारी जी

श्री मति अंकिता तिवारी जी

गुरूकुल सह प्रमुख

अध्यक्ष-श्री राम वैदिक गुरूकुल सेवा संस्थान

संत सूर्य प्रकाश शरण जी महराज

संत सूर्य प्रकाश शरण जी महराज

गुरूकुल संरक्षक

अधिकारी- आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किला अयोध्या धाम

श्री अक्षय आनंद

श्री अक्षय आनंद

संस्थापक — आनंदशाला, गुरुग्राम

ग्रैंड मास्टर, योग शिक्षक एवं जीवन मार्गदर्शक

केतन अमृतलाल तलाटी

केतन अमृतलाल तलाटी

श्री रामलला गुरुकुलम्, अयोध्या के शुभचिंतक